झूठे नागरिकों का वास्तविक दुख
देश की तरक्की बस आस है,
यह देश आज उदास है।
झूठी उम्मीदों की हममें आस है,
यह देश आज उदास है ।
युवाओं की सफलता बस उपहास है,
यह देश आज उदास है ।
मौलिक अधिकारों की सबको प्यास है,
यह देश आज उदास है।
देश का नागरिक सिर्फ लोथड़ा मांस है,
यह देश आज उदास है।
आज क्रूरता से हम बस करते विलास है,
यह देश आज उदास है।
ना पीने को पानी ना साफ़ साँस है,
यह देश आज उदास है।
पर्यावरण और पशुओं का हो रहा नाश है,
यह देश आज उदास है।
नेताओं का दोहरापन ही उनका रास है,
यह देश आज उदास है।
झूठी पत्रकारिता बतलाती झूठा विकास है,
यह देश आज उदास है।
बलात्कार आज महज़ भोग-विलास है,
यह देश आज उदास है।
जातिवाद और धर्मवाद को माना जाता देश का समाज है,
यह देश आज उदास है।
युवा मन की बरबादी का ना हमको अहसास है,
यह देश आज उदास है।
विज्ञान और दर्शन के मूल से ना हम थोड़े भी पास हैं,
यह देश आज उदास है।
संविधान का ना सम्मान बल्कि और उपहास है,
यह देश आज उदास है।
विश्वगुरु की झूठी तसल्ली देती झूठा आभास है,
यह देश आज उदास है।
इन सब से देश के सर्वनाश में हम सभी कर रहे एक झूठ प्रयास है
यह देश आज उदास है।
इसलिए भारत का मूल अर्थ भूल गए हम सभी आज हैं,
पर अभी भी वक़्त है कि इससे पहले आने वाली पीढ़ी कहे -
कि आज भी भारत कुछ नहीं, बस उदास है।
- दामिनी
Responses
No responses yet. Be the first to share what you thought.
Log in to leave a response.